Month: June 2016

गुणस्थान मीमांसा – मुनिश्री राजकरण जी (भाग-1)


जैन तत्व दर्शन में गुणस्थान का बहुत बड़ा स्थान है अतः गुणस्थान क्या है इसका संक्षिप्त विवेचन यहाँ पर करना है। जैन सिद्धान्त दीपिका में आचार्य श्री तुलसी ने कहा है कि “आत्मनः क्रमिक विशुद्धि गुणस्थानम्” अर्थात् कर्मों के क्षय, क्षयोपशम और उपशम से पैदा होने वाले पवित्र आत्म-गुणों के क्रमिक आविर्भाव को गुणस्थान कहते है। हमारा लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति है। ये गुणस्थान उस तक पहुँचने के लिए सोपान हैं।
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Flood of happiness


Dear friends,                          How do you create a Flood of happiness???                          How do you remove the darkness which is apparently felt everywhere? …

What do we Teach our Children


Do you know what you are

U are a marvel

U are Unique

In all the years that have passed

there hase never been another child like U

Your legs, your arms, your clever fingers,

the way you move…….