संवेदनाओं को बनाएं अपनी ताकत

  • क्या आपको ऐसा लगता है कि आप दूसरों की संवेदनाओं को बहुत जल्दी समझ जाते हैं?
  • क्या कभी कभी ऐसा होता है कि आप भविष्य को लेकर के बिल्कुल सही अनुमान लगा लेते हैं?
  • क्या लोगों के शब्दों के बजाय आप उनकी ऊर्जा से उनके बारे में ज्यादा गहराई से जानकारी प्राप्त करते हैं?
  • क्या किसी नकारात्मक आदमी के साथ रहकर बहुत जल्दी ही खुद को थका हुआ महसूस करते हैं?
  • क्या कभी ऐसा भी हुआ है कि अनजान लोगों ने आपसे सलाह मांगी है?

इन प्रश्नों पर गहराई से चिंतन करें और खुद से उत्तर मांगें। अगर इनमें से अधिकतर प्रश्नों के उत्तर हां में हैं तो इसका मतलब है कि आप काफी संवेदनशील हैं। हो सकता है कभी-कभी अपनी इस संवेदनशीलता को लेकर आप काफी परेशान महसूस करते हों मगर अगर सही तरीके से इस संवेदनशीलता का प्रयोग किया जाए तो आप एक अच्छे साधक तो बन ही सकते हैं अपने दिन में एक बार खुद को यह सुझाव दें कि मैं इस प्रकृति से अलग नहीं हूं बल्कि इस पूरीभीतर की अध्यात्मिक शक्तियों को जागृत कर दूसरे लोगों की सेवा भी कर सकते हैं।

इस दुनिया में हर व्यक्ति अपने आप में एक भिन्न व्यक्तित्व लेकर के आता है। अगर लोगों के व्यक्तित्व को गौर से देखा जाए तो कुछ प्रकार के भेद का भेद स्पष्ट तौर पर उभर करके आते हैं।

जैसे कुछ लोग काफी तार्किक होते हैं वह सिर्फ तथ्यों के आधार पर ही बात करना पसंद करते हैं उनकी नजर में संवेदनाएं और दिल की आवाज कोई महत्व नहीं रखते।

वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपने भीतर की आवाज पर भरोसा करते हैं और अपने निर्णय उस आवाज के आधार पर लेते हैं।

तथ्य पर जीने वाले लोग जिस प्रकार की सफलताएं प्राप्त करते हैं वे प्रायः भौतिक होती हैं क्योंकि उनकी नजर में वही महत्वपूर्ण होता है जो बाहर दिखाई देता है अदृश्य शक्तियों के बारे में न तो किसी प्रकार का कोई विश्वास रखते हैं और ना ही उनके बारे में गहराई से सोचते हैं।

वहीं संवेदनशील लोग अध्यात्मिक स्तर पर उन्नत होने की संभावनाएं लिए हुए होते हैं परंतु तब तक अपना सही विकास नहीं कर पाते जब तक कि उनकी संवेदनाओं को सही दिशा नहीं मिल जाती।

अगर आपको लगता है कि आप सच में एक संवेदनशील व्यक्ति हैं और उन संवेदनाओं के माध्यम से आपको कुछ खास तरह के अनुभव हो रहे हैं तो बेहतर होगा कि अपनी इस शक्ति को व्यर्थ न जाने दें।

कुछ बिंदुओं पर ध्यान देकर न सिर्फ आप अपनी इस शक्ति को विकसित कर सकते हैं अपितु इस के माध्यम से लोगों की सेवा भी कर सकते हैं।

  • दिन में कम से कम 1 घंटे तक मौन का गहन अभ्यास करें इस समय के दौरान हो सके वहां तक कुछ भी न पढ़ें और इलेक्ट्रॉनिक गैजटस् से भी दूर रहे।
  • सप्ताह में एक दिन कम से कम 3 घंटे शुद्ध प्रकृति के सानिध्य में अपना समय बिताएं। इस समय के दौरान प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों को निहारे और खुद को अपने आसपास से जुड़ता हुआ महसूस करें।
  • झूठ, धोखाधड़ी जैसी आदतें हमारी आंतरिक आवाज को बंद कर देती हैं इसलिए इनसे बचें।
  • कभी भी बोलने से ज्यादा सुनने पर और महसूस करने पर ध्यान दें।

संवेदनशीलता प्रकृति का दिया हुआ एक खूबसूरत उपहार है इस उपहार की रक्षा करें इसे सहेज कर रखें और इसको विकसित करें।

इस संदर्भ में यदि आप के कोई अनुभव हैं तो कमेंट सेक्शन में आप शेयर कर सकते हैं।

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