मनोहर पर्रिकर को मरने से रोकना होगा……

manohar parrikar

राजनीति के कीचड़ में कमल की तरह निर्लिप्त रहने वाले, वाणी से नहीं जीवन से कहने वाले, संयम और सादगी की मिसाल एवं निर्भीक राजनेता श्री मनोहर पर्रिकर सशरीर इस विश्व में नहीं रहे।

तूफान का प्रवाह आता है, तो उसके साथ बह जाने वाले असंख्य देखे हैं, पर धारा के विपरीत चलने का दुस्साहस कोई-कोई ही करता है। अधिकारों की प्राप्ति होने के बाद संयम होना अत्यंत मुश्किल होता है, इस बात तो श्री पर्रिकर ने गलत साबित किया है। जिनके पास कुछ नहीं होता वे त्याग, संयम, ईमानदारी की बात बेहद आसानी से कर लेते हैं, मगर मुख्यमंत्री एवं रक्षा मंत्री जैसे अधिकारपूर्ण पदों पर बैठने के बाद भी सात्विक, सरल और संजीदगी का जीवन जीकर वे लोगों के लिए प्रेरणा-पाथेय बन गए।

भौतिक शरीर का अपना धर्म है, उसे एक दिन नष्ट होना ही होता है, मगर एक शरीर वह होता है जो हमारे विचारों से बनता है। वह हमारे भौतिक शरीर की उम्र से बहुत बड़ा भी हो सकता है।

एक बार जोधपुर के महाराजा अपने नौकर के साथ किले की दीवार पर घूम रहे थे। चलते-चलते वे एक ऐसे स्थान पहुंचे जहाँ बहुत बड़ी खाई थी। उसे देखकर महाराजा ने नौकर से एक सवाल किया:- यदि कोई व्यक्ति इस खाई में गिर जाये जो कितना बड़ा धमाका होगा?

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नौकर ने जवाब देते हुए कहा:- महाराज! यह तो गिरने वाले व्यक्ति पर निर्भर करता है।

महाराज ने पुछा:- कैसे?

नौकर ने कहा:- अगर कोई मेरे जैसा सामान्य व्यक्ति गिरेगा तो उसकी गूंज सिर्फ 100-200 लोगों तक सुनाई देगी। पर यदि आप गिर जाएँ तो नौ कोटि मारवाड़ में गूंज होगी, और जो और आस-पास के राज्यों तक भी उसकी गूंज सुनाई देगी

मनोहर पर्रिकर भले ही गोवा जैसे एक छोटे से राज्य के नेता थे मगर उनके व्यक्तित्व ने उनको वैश्विक स्तर पर पहुंचा दिया। अगर उनकी सात्विकता और संयम का अंश भी हम जी सकें तो उनको फिर से जीवित कर सकते हैं और सच कहें तो उनका जाना देश के लिए हितकर नहीं है, हमें उन्हें रोकना होगा। बिना किसी श्रद्धांजलि के, बिना किसी RIP (rest in peace) के (मैं नहीं चाहता कि वे शांति से विश्राम करें क्योंकि अभी बहुत काम बाकी है)…..

जय हिन्द, जय भारत

हॉस्पिटल में इलाज के दौरान जीवन की नश्वरता एवं जीवन के कर्तव्यों के बारे में जो उन्होंने कहा उसका एक चयनित पार्ट मैं यहाँ शेयर करने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ।

As you run through the rat race of life pursuing success one must realize that at some point of time you have to reach the last part of drama in the theater where end of the show is visible.

So, learn to first look after yourself, take care of others, learn to spend your money and shower your feelings on people around you…..

Manohar parrikar’s words while he is under treatment for pancreatitis in us hospital
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3 Comments on “मनोहर पर्रिकर को मरने से रोकना होगा……

  1. Excellent tribute to such down to earth preson. Humbleness and simplicity is rear when person is on power.

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  2. Some people transcend parties to create a niche for themselves & leave an impression on people’s mind…Atalji & Parrikar belong to this category of people🤔

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