माफ़ी मत मांगें, धन्यवाद दें।

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“क्या यार मैं हमेशा ही late हो जाता हूँ,” की बजाय “मेरा हमेशा इंतजार करने के लिए मैं तुम्हारा शुक्रगुजार हूँ,” ज्यादा बेहतर वाक्य है।

“मैं भी कितना भावुक हूँ, है ना!” की बजाय “मुझे, जैसा मैं हूँ, वैसा स्वीकार करने के लिए तुम्हारा धन्यवाद,” कितना अच्छा लगेगा!

“माफ़ करो यार मैं हमेशा बिखरा हुआ ही रहता हूँ”, की बजाय “मेरी हर गलती के दौरान तुम जिस धैर्य का परिचय देते हो वो काबिल-ए-तारीफ है,” बोलिए।

“मैं तुम्हें बार-बार हेल्प मांग कर परेशान करता हूँ ना?” की बजाय “मेरा सहयोग करने के लिए तुम्हारा शुक्रिया,” कहना कितना अच्छा है।

“मैं भी कितना बडबड करता रहता हूँ,” की बजाय “मेरी बात तुम ध्यान से सुनते हो तो मुझे बहुत अच्छा लगता है,” ये कहकर वातावरण बदल सकते हैं।

कहने को तो सिर्फ शब्दों का ही फर्क है, मगर इन शब्दों साथ जो वातावरण में बदलाव आप महसूस करेंगें, वो बहुत कीमती होगा।

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