Tag: mantra

Evo4soul Meditation Resort का गरिमामय उद्घाटन समारोह।

Evo4soul Meditation Resort के उद्घाटन का गरिमामय समारोह आज प्रातः काल गंगाशहर में संपादित हुआ। पवित्र जैन मंत्रों एवं स्रोतों की धुन के बीच आयोजित हुए इस समारोह में आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जैन लूणकरण छाजेड़ ने गंगा शहर में ध्यान केंद्र… Continue Reading “Evo4soul Meditation Resort का गरिमामय उद्घाटन समारोह।”

Chakra Healing Course at Gangashahar, Bikaner

21 days chakra healing course organised at the suburban area of Bikaner by Piyush Kumar Nahata…

कांदिवली में मंत्र साधना सप्ताह का आयोजन…

कांदिवली, मुंबई में आयोजित मंत्र साधना सप्ताह में पीयूष कुमार नाहटा के वक्तव्य…

फरीदाबाद में भक्तामर कार्यशाला का सफल आयोजन।

*फरीदाबाद में आयोजित भक्तामर कार्यशाला के अन्तर्गत दिए गए वक्तव्य अब यूट्यूब पर उपलब्ध।*
भक्तामर जैन परंपरा का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है। इसके आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पक्षों सहित इसकी चिकित्सा संबंधी उपयोगिताओं पर अगणित शोध कार्य हो चुके हैं।

एक कोना साधना के लिए भी बनाएं …

अच्छा शांत स्थान जहां हमें साधना की गहराइयों तक ले जा सकता है, वहीं बहुत सारी बाधाओं से भरा हुआ, कदम कदम पर समस्याएं पैदा करने वाला स्थान हमें साधना से भटका भी सकता है।

संवेदनाओं को बनाएं अपनी ताकत

संवेदनशीलता प्रकृति का दिया हुआ एक खूबसूरत उपहार है इस उपहार की रक्षा करें इसे सहेज कर रखें और इसको विकसित करें।

5 शक्तिशाली मंत्र जो बदल सकते हैं हमारी दुनिया

हमारे शब्द हमारे लिए शाप भी बन सकते हैं और वरदान भी बन सकते हैं क्योंकि हमारे शब्द एक सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं।

हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने शब्दों की ऐसी ताकत को समझा और मंत्र शास्त्र का निर्माण किया। समय के साथ मंत्र हमारे जीवन का एक रहस्यपूर्ण हिस्सा बनते चले गए।

जैन धर्म में सरस्वती उपासना

“अनादिनिधन, तीर्थंकरों द्वारा प्रकाशित, गणधरों द्वारा मान्य, द्वादशांग-चतुर्दश पूर्व को धारण करने वाली सरस्वती जो की सत्यवादिनी है वह मुझमें उतरे” इस भाव के साथ इस मन्त्र का जप किया जाये तो सहज ही एक सुखद अहसास होता है।

स्नान के लिए करें आगम सूत्रों का प्रयोग…

स्नान करने के पश्चात हम शारीरिक रूप से खुद को तरोताजा महसूस करते हैं। आलस्य का प्रभाव भी कुछ हद तक कम हो जाता है। वहीँ जैन परंपरा में ज्ञान के अतिचारों में वर्णित अस्वाध्याय के कारणों— यथा मल-मूत्र, वीर्य रक्त आदि अशुभ तत्वों की विशुद्धि भी हो जाती है, जिनके रहने पर स्वाध्याय नहीं किया जा सकता।

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