Tag: self dating

सिद्ध हों अवतरित मुझमें

महावीर जयंती पर ढेर सारी शुभकामनाओं सहित एक कविता सादर समर्पित

माफ़ी मत मांगें, धन्यवाद दें।

“क्या यार मैं हमेशा ही late हो जाता हूँ,” की बजाय “मेरा हमेशा इंतजार करने के लिए मैं तुम्हारा शुक्रगुजार हूँ,” ज्यादा बेहतर वाक्य है। “मैं भी कितना भावुक हूँ, है ना!” की बजाय “मुझे, जैसा मैं हूँ, वैसा स्वीकार करने के लिए तुम्हारा… Continue Reading “माफ़ी मत मांगें, धन्यवाद दें।”

आज लिखें खुद को एक love letter…..

आज एक नया प्रयोग करें!
खुद को एक प्रेम-पत्र लिखें।

इस Weekend कुछ खास हो जाये

हमेशा यह सोचते हैं कि Weekend एन्जॉय करेंगें। परिवार को टाइम देंगें। खुद को टाइम देंगें। मगर सिर्फ कल्पना में ही उलझकर कर जाती है सारी योजनायें। चाही-अनचाही व्यस्तताएं हों या कुछ और पा लेने की धुन, जिंदगी को बेहतर बनाने के चक्कर में जिंदगी हम जी ही नहीं पाते।

जब जिंदगी का सूरज ना उगे तो खुद सूरज बन जाएं….

जिंदगी हमें बहुत सारे अवसर देती हैं खुश होने के लिए.. जरूरत है कि हम अपनी आंखें खुली रखें और उन पलों की खुशी मनाएं..

एक कोना साधना के लिए भी बनाएं …

अच्छा शांत स्थान जहां हमें साधना की गहराइयों तक ले जा सकता है, वहीं बहुत सारी बाधाओं से भरा हुआ, कदम कदम पर समस्याएं पैदा करने वाला स्थान हमें साधना से भटका भी सकता है।

संवेदनाओं को बनाएं अपनी ताकत

संवेदनशीलता प्रकृति का दिया हुआ एक खूबसूरत उपहार है इस उपहार की रक्षा करें इसे सहेज कर रखें और इसको विकसित करें।

प्यार हुआ चुपके से……

खुद से प्यार होते ही जिंदगी के कुछ तौर-तरीके बदल गए। क्योंकि अब मेरी मंज़िल बदल चुकी थी इसलिए मेरा रास्ता भी बदल गया। ऐसा नहीं है कि इस रास्ते पर सिर्फ फूल ही फूल थे, लेकिन चूंकि यह मेरा बनाया हुआ रास्ता था इसलिए इस रास्ते पर आने वाले कांटे भी फूलों से कम नहीं लगते थे।

एक गलती हो गई मुझसे….

एक गलती हो गई मुझसे तुम्हारे प्रति। मैं याद करता हूं उन पलों को जिन पलों में … मैंने खुद को दोषी ठहराया है याद करता हूं मैं उन पलों को जिन पलों में ………. मैंने खुद को रोता हुआ पाया है मैंने महसूस… Continue Reading “एक गलती हो गई मुझसे….”

खुद के साथ Dating पर गए हो कभी?

किसी खाली दिन में अकेले ही किसी अनजान रास्ते पर अकेले ही निकल पड़ें। ऐसे रास्ते का चुनाव करें जिसमें कोई परिचित व्यक्ति के मिलने की संभावना न हो। अच्छा हो कि शहर से दूर कोई प्राकृतिक स्थल हो या कोई छोटा सा गाँव। शांत भाव से चलते रहें, बिना किसी हड़बड़ी के, आसपास के दृश्यों का मजा लेते हुए। कहीं पहुंचना नहीं है बस खुद तक ही जाना है।

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